Tuesday, July 23, 2019



        ये बात उन दिनों की हे जब नौकरी के कारण मुझे अपने परिवार से दूर जाना पड़ा !मेरे पास मेरी बेटी थी। और वह बहुत छोटी थी ! में अपने छोटे भाई से बहुत प्यार करती थी !हालाँकि उसकी शादी हो चुकी थी और वो दो बेटों का पिता बन चूका था !दुःख की बात ये थी उसकी पत्नी मुझे पसंद नहीं करती थी !इसलिए हम भाई बहन आपस में मिल नहीं पाते थे !हाँ ये बात और थी की हम रक्षा  बंधन भाभी से छुप कर रीगल चौराहे पर मानते थे !कागज की पुड़िया में कंकु चावल ,गुड़ ,रक्षा सूत्र लेकर मैं ख़ुशी से रीगल चौराहे पर पहुंच जाती और भाई की बाँट जोहती !भाई कभी कभी ब्हुत देर से आता क्योकि भाभी से बहाने बना कर इजाजत लेनी होती थी !फिर मैं उसे रक्षा सूत्र बधती और गुड़ खा कर वह भी मेरे गले लग जाता !और ये सिलसिला सालो तक चलता रहा !और एक दिन पता चला भाई को रिश्तो की दुरी बर्दाश्त नहीं हुई !वो माता पिता के जाने के बाद एकदम अकेला हो गया था और मुझ से दूर होने के कारन अपना दुःख अपने अंदर ही पीता  गया !उसे कैंसर हो गया !तकलीफो को सेहता  हुआ कभी कभी मिलने आता था !लकिन एक दिन दर्द जीत गया और वो जिंदगी हार गया !मेरे लिए रीगल चौराहा हमेशा के लिए सूना हो गया। ...

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